प्रणाम रवीन्द्र ठाकुर महादेवी वर्मा

कार्य और कारण में चाहे जितना सापेक्ष सम्बन्ध हो किन्तु उनमें एकरूपता, नियम का अपवाद ही रहेगी। बिजली की तीखी उजली रेखा में मेघ का विस्तार नहीं देखा जाता और सौरभ की व्याप्ति में फूल का रूप-दर्शन सम्भव नहीं होता। इसी प्रकार साहित्य की सामान्य अनुभूति और साहित्यकार के व्यक्तिरूप में समानता पाना प्रायः कठिन हो जाता है। कभी-कभी तो ये दोनों इतने अनमिल ठहरते हैं कि साहित्य से उत्पन्न पूजा-भाव व्यक्ति तक पहुँच कर अवज्ञा बन जाता है या व्यक्ति-परिचय से उत्पन्न आसक्ति छलककर साहित्य को धबीला कर देती है।कवीन्द्र रवीन्द्र उन विरल साहित्यकारों में थे जिनके व्यक्तित्व और साहित्य में अद्भुत साम्य रहता है। यहाँ व्यक्ति को देखकर लगता है मानो काव्य की व्यापकता ही सिमट कर मूर्त्त हो गई और काव्य से परिचित होकर जान पड़ता है मानो व्यक्ति ही तरल होकर फैल गया है।

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सिंधुताई सपकाल: हज़ारों बेसहारा बच्चों की वो मां, जो भाषण के बदले बच्चों के लिये मांगती थी राशन

इस फ़्राइडे कर्मवीर एपिसोड के लिये समाजसेविका सिंधुताई सपकाल केबीसी के सेट पर पहुंची. शो में सिंधुताई अपनी बेटी ममता के साथ पहुंची थी. बिग बी ने सिंधुताई के पैर छू कर शो में उनका स्वागत किया. महानायक अमिताभ बच्चन ने उन्हें हज़ारों लोगों की सास-मां और दादी-नानी बताकर शो में उनका परिचय दिया. वहीं सिंधुताई ने भी शायरी के ज़रिये अपनी भावनाएं व्यक्त कर शो की शुरूआत की.

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